तेल के अलावा, Strait of Hormuz की ब्लॉकेड अब ग्लोबल इकोनॉमी की एक और अहम नस पर असर डाल रही है: फर्टिलाइजर।
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यह डिसरप्शन सिर्फ एनर्जी मार्केट्स तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कई देशों में फूड क्राइसिस को जन्म दे सकता है।
दुनिया में सागर के रास्ते होने वाली करीब एक-तिहाई फर्टिलाइज़र ट्रेड Strait of Hormuz से होकर जाती है। Persian Gulf में अस्थिरता से प्रभावित देश ग्लोबल यूरिया का लगभग 50% और अमोनिया का 30% एक्सपोर्ट करते हैं, ये दोनों ही पोषक तत्व फसलों की ग्रोथ के लिए ज़रूरी हैं।
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28 फरवरी को कॉन्फ्लिक्ट शुरू होने के बाद से Strait से शिपिंग 95% से ज्यादा घट चुकी है, UNCTAD के मुताबिक। इस वजह से असर बिल्कुल साफ है: फर्टिलाइज़र नहीं → कम पैदावार → फूड प्राइस में तेज़ उछाल → करोड़ों लोगों के लिए बेसिक सामान भी महंगा हो गया है।
यह सिर्फ एक भविष्य का रिस्क नहीं है, बल्कि पहले से चल रहा है। Egypt में ग्रेन्युलर यूरिया की कीमत, जो कि नाइट्रोजन फर्टिलाइज़र की ग्लोबल बेंचमार्क है, $700 प्रति मीट्रिक टन तक पहुंच गई है, जबकि वॉर से पहले यह $400 से $490 के बीच थी।
Food and Agriculture Organization (FAO) का अनुमान है कि अगर यह डिसरप्शन जारी रहा, तो 2026 की पहली छमाही में ग्लोबल फर्टिलाइज़र प्राइस औसतन 15% से 20% तक ज्यादा रह सकती हैं। FAO के चीफ इकॉनमिस्ट Máximo Torero ने इस ब्लॉकेड को हाल के सालों में ग्लोबल कमोडिटी फ्लो पर सबसे बड़ा झटका माना है।
UBS इकोनॉमिस्ट Arend Kapteyn का अनुमान है कि फर्टिलाइज़र की कीमतों में 48% साल-दर-साल बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे ग्लोबल फूड प्राइस 12% तक ऊपर जा सकती हैं।
यह डिस्रप्शन का समय बहुत ही महत्वपूर्ण है। भारत जैसे देशों में फर्टिलाइज़र की कमी का सीधा असर खरीफ सीजन में प्लांटिंग डिसीजन पर पड़ता है। अगर यह विंडो छूट जाती है तो पूरे साल के लिए इसके नतीजे फिक्स हो जाते हैं।
यह क्राइसिस सिर्फ लॉजिस्टिक्स की वजह से नहीं है बल्कि स्ट्रक्चरल है। Hormuz की यह डिस्रप्शन फूड सप्लाई पर ऐसे असर डाल सकती है, जो सीज़फायर या समाधान के बाद भी जारी रह सकती है।
Shanaka Anslem Perera का मानना है कि 2026 की यह क्राइसिस Sri Lanka की 2022 की तबाही से मिलती-जुलती है, फर्क बस इतना है कि इस बार यह किसी नीति से नहीं, बल्कि Strait of Hormuz में हुई सप्लाई डिस्रप्शन से आई है।
इसलिए, जो एक जियोपॉलिटिकल डिस्रप्शन के रूप में ऑयल मार्केट में शुरू हुआ था, अब वह एक मल्टी-लेयर ग्लोबल क्राइसिस में बदल रहा है। फर्टिलाइज़र मॉडर्न फूड प्रोडक्शन की नींव है। अगर इनकी सप्लाई में लंबे समय तक शॉक बना रहता है, तो इसके असर धीरे-धीरे और ज्यादा गहराते जाएंगे।
ऑयल के उलट, जिसे समय के साथ रीरूट या सब्स्टिट्यूट किया जा सकता है, फर्टिलाइज़र की कमी बहुत कमफर्टेबल नहीं होती। खेती के सीजन फिक्स होते हैं, और इनपुट मिस होने पर सीधा आउटपुट का नुकसान होता है।
अगर Strait of Hormuz में रुकावट बनी रहती है, तो दुनिया को सिर्फ एनर्जी क्रंच ही नहीं, बल्कि एक सिंक्रनाइज़्ड ग्लोबल फूड शॉक के शुरुआती लक्षण देखने को मिल सकते हैं।
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The post Strait of Hormuz अब सिर्फ ऑयल नहीं, खाने की भी प्रॉब्लम appeared first on BeInCrypto Hindi.

