जैसे-जैसे प्राइवेट क्रेडिट मार्केट में दरारें दिखने लगी हैं, वैसे-वैसे बढ़ती संख्या में एनालिस्ट्स इसे अगले फाइनेंशियल शॉक के लिए संभावित कारण के रूप में देख रहे हैं।
जो प्राइवेट क्रेडिट कभी ट्रेडिशनल लेंडिंग का मजबूत विकल्प माना जाता था, उस पर अब निवेशकों का प्रेशर बढ़ता जा रहा है, जो अपना पैसा निकालने की कोशिश कर रहे हैं।
तनाव के शुरुआती संकेत पहले ही सामने आ चुके हैं। Q1 2026 में, इन्वेस्टर्स ने $20 बिलियन डॉलर से ज्यादा रिडेम्प्शन की मांग की। इन्वेस्टर्स की चिंता इसलिए भी बढ़ रही है क्योंकि प्राइवेट क्रेडिट पोर्टफोलियोज़ में सॉफ्टवेयर कंपनियों का खासा एक्सपोज़र है। इस सेगमेंट को AI से जुड़े बदलावों से भी खतरा बढ़ता जा रहा है।
हालांकि, कई फंड्स इन मांगों को पूरा नहीं कर पाए। BlackRock, Apollo Global Management और Blue Owl जैसे बड़े एसेट मैनेजर्स ने निकासी पर लिमिट लगा दी है।
Ares Management और Morgan Stanley जैसी कंपनियों ने भी ऐसे कदम उठाए हैं, जो पूरे इंडस्ट्री में आ रही परेशानी को दिखाता है। इसके अलावा, Morgan Stanley का अनुमान है कि अगले साल में इस सेक्टर में डिफॉल्ट्स की दर 5% से बढ़कर 8% हो जाएगी।
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इसी तनाव के बीच S&P Dow Jones Indices ने CDX Financials इंडेक्स लॉन्च किया है। यह एक क्रेडिट डिफॉल्ट स्वैप (CDS) प्रोडक्ट है, जो सीधे प्राइवेट क्रेडिट फंड्स से जुड़ा है। नया इंडेक्स उत्तरी अमेरिका की 25 फाइनेंशियल कंपनियों को कवर करता है। कुछ बड़े बैंक आने वाले हफ्ते में इस डेरिवेटिव्स के सेल की योजना बना रहे हैं।
CDS एक फाइनेंशियल डेरिवेटिव है जो निवेशकों को किसी उधारकर्ता द्वारा अपने कर्ज को चुकाने में डिफॉल्ट होने के जोखिम पर हेज या दांव लगाने की सुविधा देता है। CDS ने 2008 के फाइनेंशियल क्राइसेस में बड़ी भूमिका निभाई थी:
इन घटनाक्रमों के चलते प्राइवेट क्रेडिट मार्केट की मजबूती को लेकर चिंता बढ़ रही है। यह देखना बाकी है कि क्या यह मार्केट बिना व्यापक असर के, एक लम्बे वक्त तक चले रीडेम्प्शन वेव को सहन कर पाएगा या नहीं।
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