Michael Saylor ने भविष्यवाणी की है कि Bitcoin (BTC) एक कॉइन की प्राइस $10 मिलियन तक पहुंच सकती है, क्योंकि नेटवर्क पर बने डिजिटल क्रेडिट instruments लॉन्ग-टर्म प्राइस बढ़त को बढ़ावा देंगे। Strategy के चेयरमैन ने यह अनुमान Bitcoin Conference में पेश किया।
Saylor ने कहा कि Bitcoin में डिनॉमिनेटेड क्रेडिट ग्लोबल स्तर पर स्केल होगा और इस एसेट में नया कैपिटल लाएगा। इसी आधार पर वह मानते हैं कि BTC स्ट्रक्चरल रास्ते पर विश्व की प्रमुख reserve asset और वैल्यू स्टोर बनने की ओर बढ़ रहा है।
Saylor के मुताबिक, डिजिटल क्रेडिट ऐसे फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स और लेंडिंग instruments को दर्शाता है जो BTC को collateral या settlement लेयर के रूप में रेफर करते हैं। उन्होंने तर्क दिया कि जैसे-जैसे इन instruments की इश्यू और एडॉप्शन बढ़ेगी, कैपिटल Bitcoin नेटवर्क में माइग्रेट करेगी जिससे इसकी प्राइस ऊपर जाएगी।
Strategy के चेयरमैन ने इससे मिलती-जुलती बात पहले भी कही है। उन्होंने पहले भी उन्हीं शर्तों को बताया है जिनमें Bitcoin $5 मिलियन प्रति कॉइन तक पहुंच सकता है, जिसमें spot ETFs, बैंक के BTC सर्विसेज और क्लियर US रेग्युलेशन शामिल हैं।
हाल का $10 मिलियन का टार्गेट उसी बड़ी थीसिस का हिस्सा है। Saylor की कंपनी Strategy लगातार Bitcoin खरीदती जा रही है और अब यह एसेट में सबसे बड़ी कॉरपोरेट ट्रेजरी होल्डिंग्स रखती है।
Reserve asset वाली थीसिस को फेडरल पॉलिसी से इनडायरेक्ट सपोर्ट मिला है। White House की Strategic Bitcoin Reserve की घोषणा ने सरकार के स्तर पर इस विचार को मजबूती दी है कि BTC गोल्ड के साथ नेशनल बैलेंस शीट में शामिल हो सकता है।
हालांकि, Saylor के प्राइस टार्गेट्स पर बहस जारी है। Economist Peter Schiff ने कई बार इसका विरोध किया है और कहा है कि Strategy का leveraged ट्रेजरी अप्रोच रिस्की है और अगर BTC शार्पली गिरता है तो कंपनी को बेचना पड़ सकता है जिससे स्पाइरल आ सकता है।
Schiff और अन्य गोल्ड समर्थकों का मानना है कि Bitcoin की वोलटिलिटी इसे असली रिजर्व एसेट बनने लायक नहीं बनाती।
अन्य एक्सपर्ट्स मानते हैं कि $10 मिलियन की Bitcoin प्राइस का मतलब है कि मार्केट कैप सैंकड़ों ट्रिलियन $ तक पहुंच जाएगी। ऐसा होने के लिए दशकों तक इंस्टीट्यूशनल इनफ्लो जरूरी है और ग्लोबल सेविंग्स के रखने के तरीके में बड़ा बदलाव आना होगा।
क्या डिजिटल क्रेडिट वाकई Saylor के मुताबिक डॉमिनेंट ऑन-रैंप बनेगा, यह रेग्युलेटरी क्लैरिटी और बड़े बैंक तथा एसेट मैनेजर्स की Bitcoin-डिनॉमिनेटेड प्रोडक्ट्स जारी करने की इच्छा पर निर्भर करेगा।
कस्टडी, लेंडिंग और ETF फ्लो में एडॉप्शन के इंडिकेटर्स अगले कुछ क्वार्टर्स में इस थ्योरी की टेस्टिंग करेंगे। फिलहाल, इन्वेस्टर्स के लिए सवाल ये है कि अगली Bitcoin-बैक्ड फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स की लेयर कितनी जल्दी मार्केट स्केल तक पहुंचती है।
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