AI कंपनियां हर चीज को ऑटोमेट करने की होड़ में हैं — कोड लिखने से लेकर इमेज जनरेट करने, एड शेड्यूल करने, मीटिंग्स का सारांश तैयार करने और भी बहुत कुछ। जैसे-जैसे ये सिस्टम बेहतर हो रहे हैं, इनका इंसानी मेहनत पर असर अब नजरअंदाज करना मुश्किल होता जा रहा है। अब कुछ एक्सपर्ट्स चेतावनी दे रहे हैं कि जेनेरेटिव AI एक बड़ा जॉब डिस्प्लेसमेंट ला सकता है, जो ज्यादातर इकोनॉमी के लिए उम्मीद से भी जल्दी और गहरा हो सकता है।
भविष्य का विरोध करने के बजाय, एक क्रिप्टो नेटिव प्लेटफॉर्म ने एक अलग रास्ता चुना है। अगर ऑटोमेशन अनिवार्य है, तो ओनरशिप भी होनी चाहिए।
Action Model ने आज एक इनवाइट-ओनली Chrome एक्सटेंशन लॉन्च किया है, जिससे यूज़र रियल ब्राउज़र एक्टिविटी (जैसे क्लिक, नेविगेशन पाथ, टाइपिंग और टास्क फ्लो) शेयर कर AI सिस्टम को ट्रेन कर सकते हैं। प्लेटफॉर्म इसे Large Action Model (LAM) कहता है, जो डिजिटल वर्क करना सीख सकता है, सिर्फ कंटेंट जनरेट करने तक सीमित नहीं है। बदले में, कंट्रीब्यूटर्स को पॉइंट्स मिलते हैं, जिन्हें आगे चलकर $LAM गवर्नेंस टोकन में बदला जा सकता है। ये टोकन, सिस्टम के आगे बढ़ने में भागीदारी के राइट्स को दर्शाते हैं।
“अगर AI डिजिटल लेबर को रिप्लेस करने जा रहा है, तो वर्कर्स को उन मशीनों का मालिक भी होना चाहिए, जो रिप्लेसमेंट कर रही हैं,” Action Model के फाउंडर Sina Yamani ने कहा।
जहां चैटबोट मॉडल्स सिर्फ कंटेंट जनरेट करते हैं, वहीं LAM सीधे सॉफ्टवेयर को ऑपरेट करने के लिए डिजाइन किए गए हैं। आइडिया सिंपल है — अगर कोई इंसान माउस और कीबोर्ड से डिजिटल टास्क कर सकता है, तो ट्रेन्ड AI एजेंट भी वही काम कर सकता है।
“पिछले कुछ साल चैटबोट्स के थे। अब बारी ऑटोमेशन की है,” Yamani कहते हैं। “करीब एक अरब लोग कंप्यूटर पर काम करते हैं। अगर किसी कंपनी को टूल मिल जाए, जो वही काम बहुत कम खर्चे में लगातार कर सके, तो वे जरूर उसका यूज़ करेंगे।”
Action Model का एक्सटेंशन यूजर-अप्रूव्ड बिहेवियरल डेटा कलेक्ट करता है AI को ट्रेन करने के लिए। जैसे टास्क — पे रोल सबमिट करना, CRM एंट्री मैनेज करना या बेसिक ऑपरेशन रन करना — एक बार रिकॉर्ड किए जा सकते हैं और मॉडल द्वारा बार-बार दोहराए जा सकते हैं। कंट्रीब्यूटर्स अपनी ऑटोमेशन पब्लिक मार्केटप्लेस पर पब्लिश कर सकते हैं, जहां उनके यूज और रिवॉर्ड को प्लेटफॉर्म के इंसेंटिव मॉडल में ट्रैक किया जाएगा।
एजेंटिक AI सिस्टम्स का उदय इंडस्ट्री में खूब चर्चा का विषय रहा है, क्योंकि अब ये मॉडल सिर्फ कंटेंट जनरेट करने से आगे बढ़कर ऑटोनोमस टास्क एग्जीक्यूशन करने लगे हैं। ये सिस्टम, जैसा कि इस एक्सप्लेनेर में समझाया गया है, रियल यूज़र डेटा कलेक्ट करते हैं और डिजिटल एनवायरनमेंट्स में खुद से नेविगेट करना सीखते हैं।
इस प्लेटफॉर्म ने पहले ही 40,000 से ज्यादा यूजर्स को वेटलिस्ट, रेफरल सिस्टम्स और पार्टनर कम्युनिटी के जरिए आकर्षित किया है। अब भी एक्सेस सिर्फ इनवाइट से मिलती है, ताकि कंट्रीब्यूटर्स की क्वालिटी बनी रहे और जल्दी जुड़ने वालों को रिवॉर्ड मिले।
अधिकांश मौजूदा ऑटोमेशन टूल्स APIs या कठोर इंटीग्रेशन पर निर्भर करते हैं। जबकि असली डिजिटल काम ज्यादातर पुराने सिस्टम्स, इंटरनल डैशबोर्ड्स और ऐसे टूल्स में होता है, जिन्हें कभी ऑटोमेशन के लिए डिजाइन ही नहीं किया गया था।
“Zapier सॉफ़्टवेयर को ऑटोमेट करता है, हम वर्क को,” Yamani कहते हैं। “इंटरनेट का सिर्फ 2 प्रतिशत हिस्सा APIs से एक्सेस किया जा सकता है। बाकी 98 प्रतिशत अब भी इंसानी इंटरैक्शन मांगता है।”
Action Model के साथ, यूज़र्स को न कोड लिखना होगा, न इंटीग्रेशन मैनेज करना। बस उन्हें ये रिकॉर्ड करना है कि वे टास्क पूरा कैसे करते हैं। AI इन्हीं रियल यूजर फ्लो से सीखता है और उन्हें खुद से दोहराने में सक्षम बनता है।
इससे Action Model इतना फ्लेक्सिबल हो जाता है कि वो उन एज केस और अनडॉक्युमेंटेड वर्कफ्लो को कैप्चर कर लेता है, जहां पारंपरिक सिस्टम पहुंच ही नहीं सकते।
सभी ट्रेनिंग पूरी तरह से ऑप्ट-इन है, और यूज़र्स खुद तय करते हैं कि कौन सा डेटा शेयर किया जाए। ईमेल, हेल्थकेयर या बैंकिंग जैसी सेंसिटिव साइट्स डिफ़ॉल्ट रूप से ब्लॉक रहती हैं। यूज़र्स ट्रेनिंग को कभी भी पॉज़ कर सकते हैं, किसी खास डोमेन को ब्लॉक कर सकते हैं या अपनी पूरी कंट्रीब्यूशन डिलीट कर सकते हैं।
“पहला प्रिंसिपल बहुत सिंपल है – हमें आपका पूरा डेटा नहीं चाहिए, हमें सिर्फ पैटर्न्स चाहिए,” Yamani कहते हैं। “ट्रेनिंग डेटा पहले लोकली प्रोसेस होता है और एनॉनिमाइज़ किया जाता है, उसके बाद ही वो मॉडल में योगदान करता है।”
डिलीट किया गया डेटा परमानेंटली हटा दिया जाता है और कंपनी भी उसे रिकवर नहीं कर सकती। कंट्रीब्यूटशन्स को दूसरे यूज़र्स के डेटा के साथ एग्रीगेट किया जाता है, जिससे k-anonymity के ज़रिये किसी इंडिविजुएल को पहचानना नामुमकिन हो जाता है। एक डैशबोर्ड के ज़रिये कंट्रीब्यूटर्स कभी भी अपना ट्रेनिंग हिस्ट्री और रिवॉर्ड्स देख और मैनेज कर सकते हैं।
“जहाँ Big Tech यह डेटा बिना आपकी असली परमिशन के कलेक्ट करता है, हम ट्रांसपेरेंट हैं, यूज़र-कंट्रोल्ड हैं और असली AI ट्रेनिंग करने वाले लोगों को रिवॉर्ड दे रहे हैं,” Yamani कहते हैं।
पहले के क्रिप्टो रिवॉर्ड सिस्टम्स में आई समस्याओं से बचने के लिए, Action Model बिहेवियरल एनालिसिस का इस्तेमाल करता है ताकि असली यूज़र इनपुट को वेरिफाई किया जा सके। यह सिस्टम स्ट्रक्चर, टाइमिंग, वेरिएशन, और डिसीजन-मेकिंग सिग्नल्स चेक करता है — जिन्हें bots या क्लिक फार्म्स आसानी से नहीं बना सकते।
“सिर्फ बेमतलब क्लिकिंग का कोई फायदा नहीं होता,” Yamani बताते हैं। “असली वर्कफ्लो में इंटेंट, पॉज़, करेक्शन, रीट्राई, और डिसीजन होते हैं। इसे बड़े लेवल पर फेक करना नामुमकिन है।”
दूसरे प्रोजेक्ट्स जिन्होंने सोशल इंगेजमेंट या पोस्ट्स के लिए रिवॉर्ड दिया था, हाली ही में बड़े प्लेटफॉर्म्स से बैन हो गए क्योंकि AI स्पैम, रिप्लाई bots, और फेक इंटरैक्शन की बाढ़ आ गई थी। इसके बाद API एक्सेस बंद कर दी गई और टोकन इकोसिस्टम लो क्वॉलिटी एक्टिविटी के बोझ से टूट गया।
ActionFi, प्लेटफॉर्म का रिवॉर्ड इंजन, इस ट्रैप से पूरी तरह बचने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह ट्वीट्स या क्लिक के लिए पेमेंट नहीं करता। यह सिर्फ वेरिफाइड वर्कफ्लोज़ को रिवॉर्ड करता है जो कि असली, स्ट्रक्चर्ड डिजिटल लेबर दिखाते हैं।
“हम शोर के लिए भुगतान नहीं करते। हम सिर्फ उपयोगी रास्तों के लिए पेड करते हैं,” Yamani आगे कहते हैं।
अभी Action Model एक्सटेंशन, ट्रेनिंग लॉजिक और रिवॉर्ड सिस्टम को खुद कंट्रोल करता है। लेकिन प्रोजेक्ट ने ये कमिटमेंट की है कि वक्त के साथ $LAM टोकन होल्डर्स के पास ओनरशिप ट्रांसफर की जाएगी। एक DAO स्ट्रक्चर के ज़रिये कंट्रीब्यूटर्स को मैन प्लेटफॉर्म डिसीजन्स, इंसेंटिव मैकेनिज्म और मॉडल डिप्लॉयमेंट पर कंट्रोल मिलेगा।
“शुरुआती सिस्टम्स को कोऑर्डिनेशन की जरूरत होती है। असली बात ये है कि क्या वो डिजाइन से सेंट्रलाइज्ड हैं या नहीं,” Yamani बताते हैं।
अगर जैसा बताया गया है, वैसे इम्प्लीमेंट किया जाए, तो ओनरशिप टोकन होल्डर्स को उनके डेटा से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर डिसीजन्स पर असर डालने का मौका देगी, जिसमें उनका डेटा यूज़ हुआ है।
AI की अगली जनरेशन सिर्फ भाषा नहीं, बल्कि लेबर पर भी आधारित हो रही है। ऑफिस वर्क से लेकर ऑपरेशन्स तक, अब बहुत सी डेस्क के पीछे होने वाली टास्क्स भी इंटेलिजेंट एजेंट्स के लिए आसान हो गई हैं।
“आपने सुना है कि मिलियन्स स्क्रीन-बेस्ड नौकरियां ऑटोमेट हो जाएंगी। ये दशक दूर नहीं, अभी ही हो रहा है,” Yamani कहते हैं। “अगर आपका डेटा AI को ट्रेन करने में मदद करता है, तो आप जो भी बनता है – उसके ओनर होने चाहिए।”
Action Model आने वाले महीनों में स्केल कर पाएगा, ट्रांसपेरेंट रह पाएगा, और एक सस्टेनेबल इकोनॉमी बना पाएगा या नहीं, यह हम नजदीकी से देखेंगे। लेकिन इसका दांव बिल्कुल साफ है। AI की पहचान बनाने वाली असली जंग सिर्फ ये नहीं है कि वो क्या कर सकता है, बल्कि यह है कि वो किसके लिए काम करता है।
जैसे-जैसे AI काम की दुनिया को बदल रहा है, क्या भविष्य प्लेटफॉर्म्स के पास होगा या आम लोगों के पास?
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