Ripple द्वारा हाल ही में पेश किया गया XRP Ledger (XRPL) का रोडमैप एक बेहद अहम समय पर सामने आया है। एक तरफ कंपनी XRPL को इंस्टीट्यूशनल DeFi के लिए एक मजबूत आधार के रूप में पेश कर रही है।
दूसरी तरफ, सबसे चर्चित XRP ट्रेजरी फर्मों में से एक—Evernorth—इस विज़न के जोखिमों और संभावित फायदों को रियल टाइम में महसूस कर रही है।
Evernorth के पास करीब 473 मिलियन XRP है और कंपनी Nasdaq पर XRPN टिकर के तहत डेब्यू करने की योजना का संकेत दे चुकी है। लेकिन, हाल की मार्केट की स्थिति ने ऐसे सेंट्रलाइज्ड ट्रेजरी स्ट्रैटेजी के डाउनसाइड को उजागर कर दिया है।
XRP फिलहाल करीब $1.33 पर ट्रेड कर रहा है और CoinGecko के डेटा के मुताबिक यह पिछले 24 घंटों में लगभग 7% गिरा है, जिससे Evernorth को लगभग $380 मिलियन की अनरियलाइज़्ड लॉस का अनुमान है।
यह स्थिति क्रिप्टो ट्रेजरी कंपनियों के सामने मौजूद एक बड़ा विरोधाभास दिखाती है: बड़े होल्डिंग्स बुलिश मार्केट में फायदा बढ़ा सकते हैं, लेकिन डाउनट्रेंड में नुकसान को भी बढ़ा देते हैं।
यह खास तौर पर तब सच है जब वह बुनियादी इन्फ्रास्ट्रक्चर, जिसे ज्यादा वैल्यू क्रिएट करना है, अभी बन ही रहा होता है।
Ripple के XRPL रोडमैप की ताज़ा अपडेट नेटवर्क के अगले फेज़ को एक पेमेंट्स फोकस्ड ब्लॉकचेन से व्यापक फाइनेंशियल इन्फ्रास्ट्रक्चर लेयर में ट्रांज़िशन के रूप में पेश करती है।
Ripple के अनुसार, नए फीचर्स का मकसद रेगुलेटेड इंस्टीट्यूशंस को ऑन-चेन लेंडिंग, सेटलमेंट, और लिक्विडिटी ऑपरेशंस की सुविधा देना है।
खास बात यह है कि XRP एक ब्रिज एसेट और सेटलमेंट लेयर के रूप में काम करेगा, जिसमें ये नए फीचर्स शामिल होंगे:
आने वाले अपग्रेड्स में, XRPL Lending Protocol (XLS-66) खास ध्यान खींच रहा है क्योंकि इससे ऑन-लेजर्ड क्रेडिट मार्केट्स खुल सकते हैं।
इस सिस्टम में सिंगल-एसेट वॉल्ट्स के ज़रिए पूल्ड liquidity, फिक्स्ड-टर्म लेंडिंग स्ट्रक्चर और ऑटोमेटेड रिपेमेंट मैकेनिज्म जैसी खूबियाँ आने की उम्मीद है।
खास बात यह है कि ये फीचर्स ट्रेडिशनल क्रेडिट मार्केट्स जैसे ही होंगे, लेकिन ब्लॉकचेन ट्रांसपेरेंसी और efficiency बनी रहेगी।
Evernorth के लिए ये डेवलपमेंट सिर्फ थ्योरी नहीं हैं। कंपनी पहले ही ये प्लान बता चुकी है कि प्रोटोकॉल लाइव होते ही वो अपने XRP होल्डिंग्स को लेंडिंग इकोसिस्टम में deploy करेगी।
Evernorth के Chief Business Officer Sagar Shah ने हाल ही में बताया कि यह इनिशिएटिव ऑन-चेन इंस्टीट्यूशनल liquidity के काम करने के तरीके में बड़ा बदलाव ला सकता है। उन्होंने कहा कि XRPL के लेंडिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर में भागीदारी करने से XRP holders और वाइडर इकोसिस्टम के लिए बढ़िया यील्ड के मौके खुल सकते हैं।
अगर ये स्ट्रैटेजी कामयाब रहती है तो बड़े XRP treasuries पैसिव reserves से एक्टिव और इनकम जनरेटिंग एसेट्स में बदल सकते हैं। इससे sell pressure कम हो सकता है और नेटवर्क एक्टिविटी बढ़ सकती है।
लॉन्ग-टर्म स्टोरी के बावजूद, कुछ बड़ी अनिश्चितताएँ बाकी हैं। Lending protocol को अभी पूरी तरह से लागू करना और वेलिडेटर सपोर्ट मिलना बाकी है।
साथ ही, Ripple के रोडमैप की बड़ी सफलता इस पर निर्भर करती है कि क्या वाकई इंस्टिट्यूशन्स XRP आधारित मार्केट्स में बड़े पैमाने पर कैपिटल allocate करती हैं या नहीं। केवल इन्फ्रास्ट्रक्चर से ही एडॉप्शन की गारंटी नहीं मिलती।
Liquidity, रेग्युलेटरी स्पष्टता और रियल-वर्ल्ड use cases आखिर में तय करेंगे कि XRPL पर इंस्टीट्यूशनल DeFi एक बड़ा सेक्टर बनता है या फिर सिर्फ एक निच experiment ही रहता है।
Evernorth के मौजूदा लॉसेज, और XRPL में लॉन्ग-टर्म कैपिटल deploy करने की इसकी कमिटमेंट, इसे Ripple की बड़ी स्टोरी के लिए एक शुरुआती टेस्ट केस बना रही हैं।
अगर लेंडिंग, प्राइवेसी फीचर्स, और परमिशन्ड मार्केट्स इंस्टीट्यूशनल पार्टिसिपेशन को attract करते हैं, तो आज के ट्रेजरी लॉसेज को एक नई फाइनेंशियल इन्फ्रास्ट्रक्चर लेयर में शुरुआती पोजिशनिंग माना जा सकता है।
अगर एडॉप्शन नहीं होता है, तो ट्रेजरी स्ट्रैटेजीज में सारा रिस्क इंस्टीट्यूशनल DeFi के वादे पर भारी पड़ सकता है।
इस समय, मार्केट इन दो संभावनाओं के बीच फंसा हुआ है:
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