Zcash के असली क्रिएटर्स ने आधिकारिक रूप से Electric Coin Company (ECC) से अलग होकर एक नया स्वतंत्र डेवलपमेंट एंटिटी लांच किया है, जो कि प्राइवेसी कॉइन के इतिहास में अब तक की सबसे स्पष्ट संरचनात्मक डिवाइड है।
टीम ने आज अनाउंस किया कि Zashi वॉलेट अब “Zodl” नाम से रीब्रांड होगा। इससे यह कन्फर्म होता है कि Zcash का प्रमुख वॉलेट और इसके ओरिजिनल इंजीनियर अब ECC के कंट्रोल से बाहर काम कर रहे हैं।
इस अनाउंसमेंट ने जनवरी से शुरू हुए ब्रेकअप को औपचारिक रूप दिया है, जब गवर्नेंस को लेकर Bootstrap (जो कि ECC की ओनर है) से विवाद के बाद पूरे ECC स्टाफ ने इस्तीफा दे दिया था।
यह विवाद कंट्रोल, ऑटोनॉमी और Zcash के भविष्य के डेवलपमेंट डायरेक्शन को लेकर था।
नई बनी ZODL टीम में वही इंजीनियर्स और प्रोडक्ट टीम शामिल हैं, जिन्होंने Zcash की कोर प्राइवेसी टेक्नोलॉजी बनाई थी और इसका प्रमुख वॉलेट डेवलप किया था।
इस ऑर्गनाइजेशन का कहना है कि वे ECC और Zcash Development Fund से पूरी तरह स्वतंत्र रहकर शील्डेड ZEC एडॉप्शन बढ़ाने के लिए टूल्स बनाते रहेंगे।
सबसे अहम बात, Zcash के असली क्रिएटर्स इकोसिस्टम को छोड़कर नहीं गए हैं।
बल्कि, उन्होंने अब एक नई ऑर्गनाइजेशन के तहत रीग्रुप किया है और वॉलेट इन्फ्रास्ट्रक्चर से ऑपरेशनल कंटिन्युटी बरकरार रखी है। Zodl वॉलेट पूरी तरह Zcash ब्लॉकचेन के साथ कम्पैटिबल है।
इसी दौरान, ECC अब भी Bootstrap के अंडर एक लीगल एंटिटी के तौर पर मौजूद है। हालांकि, इसके पास अब वह ओरिजिनल टीम नहीं है जिसने Zcash के मॉडर्न इन्फ्रास्ट्रक्चर को डिज़ाइन और मेंटेन किया था।
इसका परिणाम ये हुआ कि अब Zcash के फ्यूचर डेवलपमेंट से जुड़ी दो अलग-अलग ऑर्गनाइजेशनल सेंटर्स हो गए हैं।
यह डिवाइड बहुत हद तक OpenAI–Anthropic के डिवाइड जैसी है, जिसमें पुराने OpenAI लीडर्स ने नई इंडिपेंडेंट AI कंपनी बनाई थी, जब गवर्नेंस और स्ट्रैटेजिक डायरेक्शन पर मतभेद हुआ था। दोनों केस में, फाउंडिंग इंजीनियर्स और टेक्निकल लीडरशिप ने ओरिजिनल ऑर्गनाइजेशन छोड़कर अपनी पुरानी सोच के साथ पैरलल डेवलपमेंट इफर्ट शुरू किया।
इंर्पोटेंट बात ये है कि Zcash ब्लॉकचेन में कोई फोर्क नहीं हुआ है। ब्लॉक्स नॉर्मली प्रोसेस हो रहे हैं, और ZEC एसेट में कोई बदलाव नहीं है।
हालांकि, डेवलपमेंट लीडरशिप और टेक्निकल डायरेक्शन अब ओरिजिनल कॉरपोरेट स्ट्रक्चर के बाहर मौजूद है।
यह अंतर एक बढ़ता हुआ पैटर्न दिखाता है डिसेंट्रलाइज्ड इकोसिस्टम्स में, जहां डेवलपर्स की निरंतरता अक्सर इंस्टीट्यूशनल ओनरशिप से ज्यादा मायने रख सकती है।
असल में, जो इंजीनियर्स प्रोटोकॉल इन्फ्रास्ट्रक्चर को बनाते हैं और मेंटेन करते हैं, वे ही इसके लॉन्ग-टर्म प्राइस trajectory को अक्सर तय करते हैं।
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