अब Crypto AI एजेंट्स ट्रेड्स को execute करते हैं, DeFi पोजिशन्स को manage करते हैं और चैन के पार एक्सेट assets का ब्रिज करते हैं, वो भी बिना किसी इंसान की मदद के। लेकिन इनको बनाने वाले कहते हैं कि असली रेस एजेंट्स को ज्यादा स्मार्ट बनाने की नहीं, बल्कि उनकी authority को कम करने की है।
यही टेंशन आज के क्रिप्टो एजेंट इकोनॉमी को define करता है। दो infrastructure एक्सपर्ट्स का कहना है कि सबसे काम के एजेंट्स वही होंगे जिनकी फ्रीडम सबसे कम होगी।
डिफॉल्ट डिजाइन पैटर्न अब तक सिंपल रहा है। एजेंट को एक वॉलेट दो, ब्रॉड परमिशन दो और उसको ऑप्टिमाइज करने दो। CoinFello के COO और को-फाउंडर MinChi Park ने इस अप्रोच को एक liability बताया।
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Park ने इसके alternative को constraint के साथ delegation बताया। एजेंट द्वारा किया गया हर एक्शन कुछ खास टोकन, चैन, रकम और समय की सीमा के अंदर होता है। यूज़र शुरू में ही narrow परमिशन को अप्रूव करता है और हर ग्रांट को तुरंत revoke किया जा सकता है।
Park ने analogy दी कि जैसे क्रेडिट कार्ड की spending limit देना या किसी को ब्लैंक चेक थमा देना। एजेंट फ्रीली interpretation नहीं करता। वह उन्हीं boundaries में काम करता है, जो यूज़र ने तय की हैं।
Scope में authority रखने से एक risk का हल हो जाता है, लेकिन एक और risk बाकी रह जाता है। 0G Labs के CTO Ming Wu ने बताया कि चाहे एजेंट कितना भी constraint क्यों न हो, अगर उसके नीचे वाला compute लेयर डेटा लीक कर दे, तो भी एक्सपोज़ होता है।
आज की blockchain infrastructure ज्यादातर human यूजर मान कर बनाई गई है। एजेंट्स को चाहिए persistent identity, लॉन्ग-रनिंग मेमोरी और ऐसे execution environment जिनमें कोई ऑपरेटर घुस न सके।
अगर हार्डवेयर लेवल पर isolation नहीं हो, तो Wu के मुताबिक, एक compromised node वॉलेट कीज या स्ट्रैटेजी लॉजिक को एक्सपोज़ कर देती है।
उन्होंने हाल ही में गलत कॉन्फ़िगर किए गए एजेंट deployments का example दिया जिससे सैकड़ों instances में vulnerabilities सामने आ गईं। उनका कहना है कि सॉफ्टवेयर लेवल privacy guarantees काफी नहीं हैं। सही solution chip लेवल isolation है।
सबसे मजबूत संकेत वहीं हैं जो यूज़र सच में चाहते हैं। Park ने कहा कि protection-style ऑटोमेशन जैसे Aave हेल्थ फैक्टर्स की मॉनिटरिंग करना < a href="https://hi.beincrypto.com/aave-price-outlook-after-latest-crash/" target="_blank" rel="noreferrer noopener">मार्केट क्रैश के दौरान, इसकी डिमांड already autonomous ट्रेडिंग से ज्यादा है।
अक्टूबर 2025 टैरिफ शॉक इसका एक स्पष्ट उदाहरण है। कुछ ही घंटों में $19 बिलियन से ज्यादा की पोजीशन लिक्विडेट हो गईं, वहीं exchange इंटरफेस फ्रीज़ हो गए।
जिन यूजर्स ने पहले से नैरो एजेंट परमिशन को प्री-अथराइज़ किया था, वे रेस्पॉन्ड कर पाए। बाकी सभी को अपनी पोजिशन धीरे-धीरे खत्म होते हुए देखनी पड़ी।
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दोनों एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगले 12 से 24 महीनों में एजेंट-टू-एजेंट पेमेंट रेल्स और ऑनचेन आइडेंटिटी स्टैंडर्ड्स मार्केट को बदलेंगे। लेकिन प्राइस trajectory अब से ही क्लियर है।
जो एजेंट्स तेजी पकड़ रहे हैं, वे सबसे ज्यादा ऑटोनॉमी देने वाले नहीं हैं। बल्कि वे हैं जिनकी लिमिटेशन उन्हें इतने सेफ बनाती है कि उनपर ट्रस्ट किया जा सकता है।
The post क्रिप्टो के AI एजेंट्स का बूम, यूजर्स रख रहे ज्यादा कंट्रोल appeared first on BeInCrypto Hindi.


