ग्लोबल निवेशक अब पूंजी को इंडिया से हटाकर उन एशियाई मार्केट्स में लगा रहे हैं, जो मुख्य रूप से AI इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़े हुए हैं। इससे इंडिया को यह खतरा है कि वह तीन सालों में पहली बार दुनिया की टॉप पांच सबसे बड़ी स्टॉक मार्केट्स से बाहर हो सकता है।
यह बदलाव सिर्फ एक तिमाही की कमजोर अर्निंग्स से ज्यादा है। अब AI एक्सपोजर ग्लोबल फंड्स के लिए उभरते मार्केट्स में कैपिटल अलोकेशन का नया स्ट्रक्चरल फैक्टर बन गया है, जिसमें इंडिया के पास अभी ऐसे कुछ ही नाम हैं जिनमें इन्वेस्ट करना ग्लोबल फंड्स पसंद कर रहे हैं।
इंडेक्स प्रोवाइडर डेटा के अनुसार, MSCI इमर्जिंग मार्केट्स इंडेक्स में इंडिया का वेट पिछले एक साल में लगभग 19% से घटकर अब करीब 12% रह गया है।
रिपोर्ट्स इंडीकेट करती हैं कि 2026 में अब तक विदेशी निवेशकों ने इंडियन इक्विटी से नेट $21 बिलियन निकाल लिए हैं।
Goldman Sachs का अनुमान है कि विदेशी निवेशकों की मार्केट में हिस्सेदारी 14 साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है और अब दो दशकों में पहली बार घरेलू संस्थानों के मुकाबले यह प्रतिशत कम है।
M&G Investments के मुताबिक, रिएलोकेशन का लगभग दो-तिहाई हिस्सा AI पोजिशनिंग के चलते है। उन्होंने कहा।
सितंबर 2024 में, जब इंडिया के मार्केट का वैल्यू करीब $5.73 ट्रिलियन के ऑल-टाइम हाई पर था, तब से अब तक इंडियन इक्विटी से लगभग $924 बिलियन वैल्यू मिट चुकी है।
ताइवान का TAIEX इस साल अब तक लगभग 42% बढ़ा है, जबकि साउथ कोरिया का KOSPI AI चिप्स की मजबूती के दम पर नए ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गया है। एक्सचेंज डेटा के मुताबिक, इन दोनों मार्केट्स ने बीते एक साल में मिलकर कई ट्रिलियन डॉलर की इक्विटी वैल्यू जोड़ी है।
इनके प्रमुख चैम्पियन्स, जिनमें TSMC, Samsung और SK Hynix आगे हैं, सीधे AI बिल्डआउट से जुड़े हुए हैं, जहां इंडियन कंपनियां सप्लाई नहीं करती हैं।
यही रोटेशन अब नए प्रोडक्ट्स में भी दिख रहा है जैसे S&P Global की हाइब्रिड क्रिप्टो-इक्विटी बेंचमार्क, जिसमें लॉर्ज-कैप स्टॉक्स को लीडिंग AI-लिंक्ड टोकन्स के साथ जोड़ा गया है।
Nifty IT इंडेक्स 2026 में लगभग 26% गिर चुका है, जबकि ब्रॉडर Nifty 50 करीब 9% नीचे है।
Tata Consultancy Services और Infosys, जो भारत के $315 बिलियन IT सर्विस सेक्टर की रीढ़ हैं, OpenAI के नए एंटरप्राइज डिप्लॉयमेंट यूनिट के एनाउंसमेंट के बाद 52-वीक के नए लो पर पहुंच गए।
जनरेटिव AI टूल्स कोडिंग, टेस्टिंग और बैक-ऑफिस का काम ऑटोमेट कर रहे हैं, जिन पर इन कंपनियों ने अपनी मार्जिन बनाई है।
करीब 1.5 करोड़ भारतीय IT सर्विसेज व ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स में काम करते हैं, जिससे देश की इकोनॉमी की एक पूरी लेयर AI-ड्रिवन एजेंट्स की सीधी चपेट में आ गई है।
भारतीय पॉलिसीमेकर्स सेमीकंडक्टर इंसेंटिव्स, डाटा सेंटर विस्तार और नेशनल AI मिशन पर फोकस कर रहे हैं। लेकिन आने वाले कई क्वार्टर ये दिखाएंगे कि क्या ये स्ट्रेटेजी देश के इक्विटी मार्केट से हो रही स्ट्रक्चरल शिफ्ट को रोक पाएगी या नहीं।
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