Trump प्रशासन लगभग $2 बिलियन की राशि नौ क्वांटम कंप्यूटिंग कंपनियों को देगा, जिसमें सरकार सभी में माइनॉरिटी इक्विटी स्टेक लेगी। इस स्ट्रक्चर के तहत फेडरल ग्रांट्स को वेंचर-स्टाइल पोजीशन्स में बदला जाएगा, जिससे इंडस्ट्री की अलग-अलग हार्डवेयर अप्रोच से जुड़ी कंपनियों को फायदा मिलेगा।
US स्टॉक मार्केट में जो सबसे ज्यादा इसका फायदा उठाएंगे, वो हैं – IBM, GlobalFoundries, D-Wave Quantum, Rigetti Computing और Infleqtion. इनके टिकर्स — IBM, GFS, QBTS, RGTI और INFQ — में रिपोर्ट के बाद प्री-मार्केट ट्रेडिंग में हलचल दिखी।
क्वांटम से जुड़ी बाकी कंपनियां भी सेक्टर की पॉजिटिव मोमेंटम से फायदा उठा सकती हैं, लेकिन इन पांच को इनिशिएटिव में खासतौर पर हाइलाइट किया गया है क्योंकि ये डायरेक्टली लिस्टेड स्टॉक्स हैं।
WSJ के एक रिपोर्ट के अनुसार Commerce Department ने बताया कि IBM को $1 बिलियन मिलेंगे, जबकि GlobalFoundries को $375 मिलेंगे। छह छोटी कंपनियों में D-Wave Quantum, Rigetti Computing, Infleqtion और Diraq शामिल हैं।
Commerce Department के ये डील्स पारंपरिक ग्रांट्स को ओनरशिप पोजिशन में बदल देती हैं। यह स्ट्रक्चर Trump द्वारा पिछले साल Intel में लिए गए स्टेक जैसी मिसाल को फॉलो करता है।
उस प्लान में $5.7 बिलियन CHIPS Act फंडिंग को लगभग 433 मिलियन Intel के शेयर्स में बदला गया था। बाद में उनकी वैल्यू $56 बिलियन से ज्यादा आँकी गई थी।
ग्रांट पाने वाली कंपनियां हर बड़ी क्वांटम तकनीक अप्रोच को कवर करती हैं। IBM और Rigetti सुपरसंडक्टिंग क्यूबिट्स पर फोकस करते हैं, D-Wave के पास एनीलिंग सिस्टम हैं, और Infleqtion न्यूट्रल एटम्स के साथ काम करता है।
Diraq, जिसे $38 मिलियन मिलेंगे, सिलिकॉन स्पिन क्यूबिट्स बनाती है। यह पोर्टफोलियो खासतौर पर अलग-अलग अप्रोच के साथ डाइवर्सिफाइड रखा गया है।
पब्लिकली ट्रेडेड रिसीपियंट्स के शेयर्स में इस न्यूज़ के चलते प्री-मार्केट ट्रेडिंग में 7% से 21% तक का उछाल आया।
समर्थकों का कहना है कि इसे स्ट्रैटेजिक कैपिटलिज्म कहा जा सकता है। वे मानते हैं कि टैक्सपेयर का पैसा अगर हाई-रिस्क टेक्नोलॉजी में निवेश हो रहा है, तो जब वो दांव सफल हो जाएं तो उसे उसका फायदा भी मिलना चाहिए।
हालांकि, आलोचकों का तर्क है कि प्राइवेट फर्म्स में सरकारी इक्विटी रेगुलेटरी बाउंड्रीज़ को धुंधला कर देती है और यह राज्य-निर्देशित मार्केट इंटरवेंशन जैसा लगता है।
यह प्लेबुक बिल्कुल वैसे ही है जैसे कोई क्रिप्टो फंड किसी थीसिस कैटेगरी में निवेश करता है। जैसे a16z या Paradigm, L1s, L2s, restaking और DePIN में चेक लगाते हैं ताकि पूरे मोडैलिटी को सपोर्ट किया जा सके, न कि किसी एक विनर को, वैसे ही Commerce विभाग ने लिखा है:
अब ये निवेश अलग-अलग हार्डवेयर अप्रोचेस पर किए गए हैं, जहां अभी किसी को नहीं पता कि कौन-सा अप्रोच बड़े स्केल पर चल पाएगा।
माइनोरिटी इक्विटी स्ट्रक्चर एक नॉर्मल SAFE या टोकन वारंट जैसा है: अभी कैपिटल डालो, और सिर्फ तब फायदा लो जब टेक्नोलॉजी वाकई रोल-आउट हो जाए।
IBM को दिया गया $1 बिलियन एंकर इन्वेस्टमेंट है, जबकि Diraq को मिला $38 मिलियन शुरुआती स्टेज का दांव है।
क्रिप्टो VCs की तरह, सरकार इन कंपनियों को ऐक्टिवली चला नहीं सकती, लेकिन वह इतना हिस्सा रखती है कि फाइनल आउटकम में उसका भी शेयर रहेगा।
मुख्य फर्क नीयत में है। जहां क्रिप्टो फंड्स LPs के लिए IRR के पीछे दौड़ते हैं, वहीं Washington की कोशिश चीन के खिलाफ स्ट्रैटेजिक पोजिशनिंग की है। बाकी पोर्टफोलियो की लॉजिक दोनों में बहुत हद तक एक जैसी है।
क्वांटम कंप्यूटिंग की क्रिप्टो में अहमियत, इस बहस में एक और लेयर जोड़ देती है। जब क्वांटम मशीनें काफी एडवांस हो जाएंगी, तो क्रिप्टो को सिक्योर करने वाली एन्क्रिप्शन को तोड़ सकती हैं, जिससे Bitcoin और Ethereum वॉलेट्स को खतरा है।
IBM के चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर ने हाल ही में क्वांटम को लेकर चेतावनी दी है कि इस फील्ड के रिस्क उम्मीद से कहीं तेज़ स्पीड में बढ़ रहे हैं।
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इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स अभी भी Bitcoin क्वांटम टाइमलाइन को लेकर सहमत नहीं हैं। कुछ का मानना है कि यह कुछ सालों में आ सकता है, जबकि कुछ इसे कई दशकों दूर मानते हैं।
क्रिप्टो नेटवर्क्स पहले से ही अपनी सुरक्षा टेस्ट कर रहे हैं। हाल ही में, BNB Chain ने अपने नेटवर्क पर क्वांटम टेस्ट पूरा किया है।
वोटिंग राइट्स, लॉकअप्स और एग्जिट टर्म्स अभी डिस्क्लोज़ नहीं किए गए हैं। यही डिटेल्स तय करेंगी कि यह पैकेज वेंचर फंड की तरह काम करेगा या ट्रेडिशनल CHIPS-स्टाइल ग्रांट की तरह।
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