Goldman Sachs ने पहली बार स्पष्ट सबूत पाया है कि कॉलेज स्टूडेंट्स उन मेजर्स से दूर जा रहे हैं, जिन पर AI का ज्यादा असर है। कंप्यूटर साइंस और प्रोग्रामिंग में नामांकन 2025-2026 के शैक्षणिक वर्ष में 10% से ज्यादा गिर गया है।
यह पीछे हटना, हायर एजुकेशन के रिवैल्यूएशन का हिस्सा है। अब स्टूडेंट्स, एम्प्लॉयर्स और यहां तक कि बिजनेस स्कूल भी डिग्री को इसी नजरिए से देख रहे हैं कि वे ऑटोमेशन का कितना सामना कर पाती हैं।
इस गिरावट ने कंप्यूटर साइंस एडमिशन के कई सालों की तेजी को उलट दिया है, जो 2024-2025 से पहले के डेटा में देखने को नहीं मिलती थी।
उन फील्ड्स में एडमिशन बढ़े हैं, जिनमें AI रिप्लेसमेंट का रिस्क कम है। औसतन इनमें करीब 3% की बढ़ोतरी देखी गई है, जिसमें हेल्थकेयर और इंजीनियरिंग लीड कर रहे हैं।
यह गिरावट अलग-अलग यूनिवर्सिटीज़ में भी दिख रही है। Arizona State University में बैचलर लेवल पर कंप्यूटर साइंस का नामांकन फॉल 2024 से फॉल 2025 के बीच लगभग 14% गिर गया।
Washington University in St. Louis में भी कंप्यूटर साइंस मेजर्स की संख्या दो सालों में 16% कम हुई है।
स्टूडेंट्स से उनके डर के बारे में सवाल पूछने की बजाय, Goldman Sachs के इकोनॉमिस्ट Pierfrancesco Mei ने यह स्टडी की कि ग्रेजुएट्स असल में किस सेक्टर में काम कर रहे हैं।
उन्होंने 2022 से 2024 तक की Census survey डेटा की मदद से 180 से ज्यादा मेजर्स को जॉब्स से जोड़ा और फिर हर प्रोफेशन का ऑटोमेशन रिस्क स्कोर किया।
कंप्यूटर साइंस, स्टैटिस्टिक्स और क्वांटिटेटिव बिजनेस मेजर्स में ऑटोमेशन का रिस्क सबसे ज्यादा रहा। वहीं फार्मेसी, नर्सिंग और एजुकेशन सबसे सेफ गिनी गईं।
ये स्टूडेंट्स अब ऐसे मार्केट को समझ रहे हैं जहां Goldman Sachs का अनुमान है कि AI हर महीने US में नौकरियां काट रहा है। Mei मानते हैं कि इस बार टेक्नॉलॉजिकल बदलावों का असर पहले से कहीं ज्यादा जल्दी दिख सकता है।
यह चिंता वाजिब है। Federal Reserve Bank of New York के अनुसार, 2025 के अंत तक नए ग्रेजुएट्स में बेरोजगारी करीब 5.7% रही। अंडरइम्प्लॉयमेंट 42.5% पर पहुंच गई, जो 2020 के बाद सबसे ज्यादा है।
एम्प्लॉयर्स, अब उन एंट्री-लेवल जॉब्स को ऑटोमेट कर रहे हैं, जिनके लिए पहले ट्रेन्ड ग्रेजुएट्स की जरूरत होती थी। AI अब टेक सेक्टर में एंट्री-लेवल जॉब्स ले रहा है। अकेले Block ने करीब 4,000 जॉब्स कट कर दी और इस फैसले को ऑटोमेशन से जोड़ा।
ServiceNow के CEO Bill McDermott वह AI एजेंट्स बेच रहे हैं जो ऑटोमेशन कर रहे हैं। उनका कहना है कि ग्रेजुएट्स की बेरोजगारी दर मिड-30% तक जा सकती है, क्योंकि ये एजेंट्स शुरुआती करियर के कई जॉब्स ले लेंगे।
ग्रेजुएट स्कूल्स में भी अब रीप्राइसिंग का असर दिखने लगा है। मिड-टियर प्रोग्राम्स MBA की फीस में 50% तक कटौती कर रहे हैं, जैसे Purdue ने अपनी ऑनलाइन MBA फीस $60,000 से घटाकर $36,000 कर दी है।
इस चक्र में एप्लिकेशन्स 20% से 30% तक गिरती जा रही हैं, लेकिन टॉप 20 में कोई भी कटौती करने वाला स्कूल नहीं है। शानदार प्रोग्राम्स अब भी अपनी फीस पर कायम हैं, जबकि डिस्काउंट देने वाले वे स्कूल हैं जो अब तकनीकी स्किल्स सिखाते हैं, जो AI के कारण सस्ते हो गए हैं।
जुलाई से ग्रेजुएट लोन के लिए नई $100,000 की कैप लागू हो जाएगी। कैंपस में निराशा साफ दिख रही है, जैसे इस महीने Stanford के ग्रेजुएट्स ने Google के CEO के भाषण के दौरान वॉकआउट किया।
हर कोई इस बदलाव को आसान रास्ता नहीं मानता। कई अर्थशास्त्री मानते हैं कि AI प्रोफेशन खत्म करने के बजाय ज्यादातर नौकरियों का रूप बदल देगा।
Goldman खुद डाटा को एडॉप्टेशन के रूप में देखता है, और मानता है कि युवा वर्कर्स ने पिछली टेक्नोलॉजी बदलावों में खुद को बुजुर्गों से ज्यादा जल्दी ढाला है।
कंप्यूटर साइंस पहले भी चक्र देख चुका है, जैसे डॉट-कॉम क्रैश के बाद इसमें गिरावट आई, लेकिन फिर ऑल-टाइम हाई तक पहुंच गया। World Economic Forum का अनुमान है कि AI 2030 तक 170 मिलियन नई जॉब्स बना सकता है।
सबसे बड़ा फर्क स्किल्स में है, न कि मेजर में। ये बात NVIDIA के CEO Jensen Huang ने Milken Institute में बताई।
ये बदलाव अभी तक पूरी तरह से साबित नहीं हुआ है। नर्सिंग प्रोग्राम्स की सीटें लिमिटेड हैं, और इंजीनियरिंग की नई सप्लाई तैयार होने में 4-5 साल लग जाते हैं।
यहां तक कि हेल्थकेयर भी अछूता नहीं है, क्योंकि AI पहले से ही शेड्यूलिंग, रिकॉर्ड्स और डायग्नोस्टिक्स के कुछ हिस्सों को संभाल रहा है। जो लोग इन टूल्स को अपनाने से बच रहे हैं, वो ज्यादा छंटनी का खतरा उठा सकते हैं, बजाय उनके जो AI को अपना रहे हैं।
आज जो स्टूडेंट्स अपना रास्ता बदल रहे हैं, वे हो सकता है जॉब मार्केट का रूप बदल दें, इससे पहले कि किसी को मालूम हो कि उनका फैसला सही था या नहीं।
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