Wall Street के सबसे पावरफुल derivatives exchange CME Group अपने खुद के क्रिप्टो-स्टाइल टोकन पर काम कर रहा है, और इसके मायने सिर्फ एक और इंस्टीट्यूशनल एक्सपेरिमेंट से कहीं ज्यादा हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, CME Group के CEO Terry Duffy ने कहा है कि कंपनी “अपने खुद के कॉइन” के साथ इनिशिएटिव्स पर विचार कर रही है, जो एक डिसेंट्रलाइज्ड नेटवर्क पर काम कर सकता है। यह कमेंट मार्जिन और टोकनाइज्ड कोलेटरल की चर्चा के दौरान आया था, कस्टमर क्रिप्टो या पेमेंट्स के लिए नहीं।
यह फर्क अहम है। अगर CME का कॉइन लॉन्च होता है, तो वह न तो आम क्रिप्टोकरेन्सी जैसा होगा और न ही रिटेल stablecoin जैसा।
इसके बजाय, यह ग्लोबल फाइनेंशियल मार्केट्स में रिस्क के मूवमेंट को चुपचाप कंट्रोल करने वाला एक कोर मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर बन सकता है।
CME की बातचीत का फोकस कोलेटरल और मार्जिन पर था, जो derivatives ट्रेडिंग की बुनियाद है। CME पर हर फ्यूचर्स या ऑप्शंस पोजीशन ट्रडर्स को मार्जिन देने की जरूरत होती है, जो अक्सर कैश या हाई-क्वालिटी लिक्विड एसेट्स में होता है।
अगर CME इस प्रोसेस को टोकनाइज़ करता है, तो मार्जिन ऑन-चेन मूव कर सकता है, लगभग रियल टाइम और लगातार। इससे ट्रेडिशनल बैंकिंग रेल्स पर डिपेंडेंसी कम होगी, जो आज भी लिमिटेड घंटों में ही काम करती है।
महत्वपूर्ण बात ये है कि CME पहले से ही डिसाइड करता है कि कौन सा एसेट एक्सेप्टेबल कोलेटरल है। CME का अपना टोकन इस कंट्रोल को टोकनाइज्ड एनवायरनमेंट तक एक्सटेंड कर देगा, लेकिन रूल्स सेट करने वाला वही रहेगा।
USDC और USDT जैसे stablecoins अपनी साइज और ट्रेडिंग और पेमेंट्स में यूज के चलते क्रिप्टो न्यूज़ में छाए रहते हैं। लेकिन इनका मेन मकसद है सिर्फ पैसा मूव करवाना।
CME का कॉइन रिस्क को मूव करेगा।
CME इंटरेस्ट रेट्स, इक्विटीज, कमोडिटीज और क्रिप्टो जैसे एसेट्स में ट्रिलियंस $ की डेरिवेटिव्स एक्सपोजर क्लियर करता है। उस सिस्टम में यूज़ होने वाले मार्जिन इंस्ट्रूमेंट्स की स्पीड और सिस्टमिक इम्पोर्टेंस ज्यादा होती है बनिस्बत ज्यादातर पेमेंट टोकन्स के।
अगर CME का कॉइन मार्जिन के लिए एलिजिबल बन गया, तो वो प्राइस डिस्कवरी और फाइनेंशियल स्टेबिलिटी के सेंटर में आ जाएगा। Stablecoins शायद ही ये रोल निभाते हैं।
मॉडर्न फाइनेंस में असली bottleneck कोलेटरल ही है। यही तय करता है कि कौन ट्रेड कर सकता है, कितनी leverage ले सकता है और मार्केट वोलाटिलिटी के वक्त स्ट्रेस कैसे फैलता है।
अगर CME अपना टोकनाइज्ड कोलेटरल जारी करता है, तो वह मार्केट्स को डिसेंट्रलाइज नहीं करेगा। बल्कि अपनी पोजिशन को एक ट्रस्टेड इंटरमीडियरी के तौर पर और मजबूत करेगा—इस बार ब्लॉकचेन रेल्स के जरिए।
एक CME कॉइन लगभग निश्चित रूप से सिर्फ संस्थागत प्रतिभागियों तक ही सीमित रहेगा। इसे ट्रेडिंग, सट्टेबाज़ी या यील्ड जेनरेशन के लिए नहीं बनाया जाएगा।
इसमें ओपन गवर्नेंस नहीं होगी, न ही परमिशनलेस एक्सेस, और न ही DeFi इंटीग्रेशन। ब्लॉकचेन सिर्फ एक साझा इन्फ्रास्ट्रक्चर की तरह काम करेगा, न कि एक ओपन फाइनेंशियल सिस्टम की तरह।
यह उसी तरह है जैसे दूसरे Wall Street फर्म्स टोकनाइजेशन को अपनाते हैं: टेक्नोलॉजी तो लेते हैं, लेकिन मौजूदा पावर स्ट्रक्चर को बरकरार रखते हैं।
The post Wall Street की नजर CME Coin पर, स्टेबलकॉइन्स से भी ज्यादा अहम साबित हो सकता है appeared first on BeInCrypto Hindi.


