ग्लोबल मार्केट्स में नई अस्थिरता का दौर शुरू हो सकता है, क्योंकि Goldman Sachs ने चेतावनी दी है कि सिस्टेमेटिक फंड्स आने वाले हफ्तों में स्टॉक्स में से दर्जनों अरब $ के शेयर्स सेल-ऑफ़ कर सकते हैं।
यह सेल-ऑफ़ वेव Bitcoin, सोना और चांदी के प्राइस पर भी असर डाल सकती है, क्योंकि लिक्विडिटी कंडीशंस कमजोर हो रही हैं।
Goldman की ट्रेडिंग डेस्क के मुताबिक, कमोडिटी ट्रेडिंग एडवाइजर्स (CTAs) जैसे ट्रेंड-फॉलो करने वाले फंड्स S&P 500 में पहले ही सेल संकेत दे चुके हैं। और भी अहम बात ये है कि अगले कुछ समय में ये फंड्स नेट सेलर्स ही रहेंगे, चाहे मार्केट्स स्थिर रहें या गिरते जाएं।
बैंक का अनुमान है कि करीब $33 अरब शेयर एक हफ्ते में बेचे जा सकते हैं अगर मार्केट और कमजोर होती है।
और महत्वपूर्ण, Goldman के मॉडल्स के अनुसार S&P 500 अगर और गिरता है या जरूरी तकनीकी लेवल्स तोड़ता है, तो अगले महीने में सिस्टेमेटिक सेल-ऑफ़ की रकम $80 अरब तक जा सकती है।
मार्केट की हालत पहले ही नाजुक है। Goldman के एनालिस्ट्स ने बताया कि लिक्विडिटी खराब हो चुकी है और ऑप्शंस पोजिशनिंग में बदलाव आया है, जिससे प्राइस मूवमेंट और ज्यादा तेज हो सकता है।
जब डीलर “शॉर्ट गामा” पोजिशन में होते हैं, तब वे गिरते मार्केट में बेचना और चढ़ते मार्केट में खरीदना पड़ता है, जिससे वोलैटिलिटी और तेज हो जाती है और इंट्राडे मूव्स बढ़ सकते हैं।
Goldman ने यह भी बताया है कि बाकी सिस्टेमेटिक स्ट्रैटेजीज—जैसे रिस्क-पैरिटी और वोलैटिलिटी-कंट्रोल फंड्स—अगर वोलैटिलिटी और बढ़ती है, तो वह भी अपनी एक्सपोजर कम कर सकते हैं। यानी प्रेशर सिर्फ CTAs की वजह से नहीं रहेगा।
इन्वेस्टर सेंटिमेंट में भी दबाव नजर आ रहा है। Goldman का इंटरनल Panic Index हाल ही में एक्सट्रीम स्ट्रेस के लेवल तक पहुंच गया।
इस बीच, रिटेल इनवेस्टर्स जिन्होंने पिछले साल बड़ी तेजी से गिरावट पर खरीदारी की थी, अब थके हुए नजर आ रहे हैं। हालिया फ्लो में नेट सेलिंग दिख रही है, खरीदारी नहीं।
Goldman का विश्लेषण भले ही शेयर मार्केट पर केंद्रित रहा, लेकिन इसके असर शेयर मार्केट से भी आगे जाएंगे।
इतिहास में देखा गया है कि जब बड़े पैमाने पर फ्लो-ड्रिवन इक्विटी सेल-ऑफ़ और लिक्विडिटी की टाइट स्थिति होती है, तो इससे मैक्रो-सेंसिटिव एसेट्स में, जिसमें क्रिप्टो भी शामिल है, वोलाटिलिटी बढ़ जाती है।
Bitcoin, जो लिक्विडिटी स्ट्रेस के समय व्यापक रिस्क सेंटिमेंट के अनुसार ट्रेड करता है, अगर इक्विटी में फोर्स्ड सेलिंग तेज होती है तो उसमें फिर से वोलाटिलिटी बढ़ सकती है।
क्रिप्टो-लिंक्ड इक्विटी और रिटेल-फेवर्ड स्पेक्युलेटिव ट्रेड्स ने हाल की मार्केट मूव्स के लिए पहले से ही सेंसिटिविटी दिखाई है, जिससे पता चलता है कि पोजीशनिंग अभी भी कमजोर है।
इसी दौरान, इक्विटी मार्केट में हलचल जटिल क्रॉस-एसेट फ्लो को ट्रिगर कर सकती है। जहां रिस्क-ऑफ़ सिचुएशन में कमोडिटीज पर प्रेशर आ सकता है, वहीं गोल्ड और सिल्वर जैसे कीमती धातु इस तरह के अनिश्चित माहौल में सेफ-हेवन डिमांड भी हासिल कर सकते हैं। इससे लिक्विडिटी ट्रेंड्स और $ की मजबूती के आधार पर दोनों दिशाओं में प्राइस में तेज बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
फिलहाल सबसे जरूरी फैक्टर लिक्विडिटी ही बनी हुई है। सिस्टेमैटिक फंड्स के डिलेवरेज होने, वोलाटिलिटी बढ़ने, और सीजनल मार्केट वीकनेस आने के कारण, आने वाले हफ्तों में मार्केट में अस्थिरता रह सकती है।
अगर Goldman की प्रोजेक्शन सच हुई, तो आने वाला महीना इक्विटी मार्केट के लिए चुनौतीभरा रह सकता है, और इसका असर Bitcoin और कीमती धातुओं पर भी दिख सकता है।
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