कल, 11 फरवरी 2026 को, पहला L1-zkEVM वर्कशॉप एक नए सिस्टम की पहली झलक देगा, जिससे ब्लॉक वैलिडेशन सभी के लिए तेज़, सस्ता और ज्यादा आसान हो सकता है।
अब हर ट्रांजैक्शन को फिर से एक्सीक्यूट करने की जगह, Ethereum जल्द ही zero-knowledge (ZK) proofs पर डिपेंड कर सकता है। इससे वैलिडेटर्स क्रिप्टोग्राफिक प्रूफ्स के जरिए करेक्शन वेरिफाई कर पाएंगे।
Ethereum Foundation के रिसर्चर Ladislaus.eth ने इसे नेटवर्क के इतिहास में “सबसे महत्वपूर्ण” अपडेट्स में से एक बताया है।
यह बदलाव L1-zkEVM 2026 रोडमैप का हिस्सा है और EIP-8025 (Optional Execution Proofs) फीचर पर फोकस करता है। इसमें कुछ वैलिडेटर्स, जिन्हें zkAttesters कहा जाता है, क्रिप्टोग्राफिक प्रूफ्स के जरिए ब्लॉक्स को कन्फर्म कर सकते हैं, यानी उन्हें खुद हर ट्रांजैक्शन चेक करने की ज़रूरत नहीं होगी।
यह बदलाव ऑप्शनल है, मतलब किसी पर इसे अपनाने की मजबूरी नहीं है और सभी मौजूदा नोड्स पहले की तरह ही काम करेंगे। लेकिन जिन्होंने इसे अपनाया, उनके लिए फायदे काफी बड़े हो सकते हैं।
अभी, किसी ब्लॉक को वेलिडेट करने के लिए हर ट्रांजैक्शन को फिर से एक्सीक्यूट करना पड़ता है, और नेटवर्क के बढ़ने के साथ यह और ज्यादा समय व रिसोर्सेज लेता है।
ZK proofs की मदद से zkAttesters बिना पूरी ब्लॉकचेन स्टोर किए लगभग तुरंत ही किसी ब्लॉक को वेरिफाई कर सकते हैं।
यह सिर्फ स्पीड की बात नहीं है। हार्डवेयर, स्टोरेज और बैंडविड्थ की जरूरत कम करके Ethereum को ज्यादा लोगों के लिए एक्सेसिबल बनाया जा सकता है।
सोलो स्टेकर्स और होम वैलिडेटर्स भी रेगुलर कंज्यूमर हार्डवेयर से पूरी तरह से पार्टिसिपेट कर सकते हैं। इससे नेटवर्क डिसेंट्रलाइज रहेगा और “डोंट ट्रस्ट, वेरिफाई” की फिलॉसफी भी कायम रहेगी।
ज्यादा गैस लिमिट्स और तेज़ एक्सीक्यूशन भी मुमकिन है, वह भी छोटे पार्टिसिपेंट्स को बाहर किए बिना।
EIP-8025 फ्लेक्सिबिलिटी और सिक्योरिटी पर जोर देता है। मल्टीपल क्लाइंट्स से आए प्रूफ्स नेटवर्क में शेयर किए जाते हैं और जब तक इंडिपेंडेंट प्रूफ्स वेरीफाई नहीं हो जाते (अभी के लिए तीन में से पांच) तब तक वैलिडेटर्स किसी ब्लॉक को एक्सेप्ट नहीं करते।
यह तरीका क्लाइंट सॉफ्टवेयर की डाइवर्सिटी को बचाए रखता है और साथ ही नेटवर्क को सेफ, इनक्लूसिव और सेंट्रलाइजेशन से बचाए रखने में मदद करता है।
यह समय बिल्कुल सही कहा जा सकता है। 2026 में Ethereum की इंस्टीट्यूशनल एडॉप्शन तेजी से बढ़ रही है। Fidelity Digital Assets, Morgan Stanley, Grayscale, BlackRock और Standard Chartered जैसे बड़े नाम नेटवर्क में एक्टिव रूप से निर्माण या निवेश कर रहे हैं।
Tokenized assets, stablecoins और staking products लगातार विस्तार कर रहे हैं। वहीं, Glamsterdam hard fork जैसे प्रोजेक्ट्स (जिसमें enshrined proposer-builder separation, ePBS शामिल है) L1 लेयर पर ZK proof generation के प्रैक्टिकल इम्प्लिमेंटेशन को सपोर्ट कर रहे हैं।
L1-zkEVM डेवेलपमेंट का फायदा Layer 2 rollups और zkVM वेंडर्स — जैसे ZisK, openVM, और RISC Zero — को भी मिल रहा है, जो आज के दिन Ethereum blocks को प्रूव कर रहे हैं। Execution witness और ZK VM APIs को स्टैंडर्डाइज करने से शेयर इन्फ्रास्ट्रक्चर बनता है, जिससे L1 वैलिडेटर और L2 प्रोटोकॉल दोनों ही समान proofs का फायदा ले सकते हैं।
11 फरवरी को होने वाला वर्कशॉप इन छह प्रमुख सब-थीम्स को कवर करेगा:
यह Ethereum के 2026 रोडमैप की आधिकारिक शुरुआत है, जिसमें ब्लॉक वेलिडेशन को ऑप्शनल, प्रूफ-ड्रिवन और काफी एफिशिएंट बनाने का प्लान है।
अगर एडॉप्शन बढ़ता है, तो EIP-8025 एक बार फिर लैपटॉप्स पर भी फुल-वेरिफाइंग नोड्स को संभव बना सकता है और Ethereum की बेस लेयर को बिना डिसेंट्रलाइजेशन या सिक्योरिटी की कुर्बानी दिए स्केल कर सकता है।
चाहे आप वैलिडेटर हों, डेवेलपर या यूज़र, यह Ethereum के लिए ब्लॉक वेलिडेशन के नए युग की शुरुआत हो सकती है।
कल का L1-zkEVM वर्कशॉप पहली झलक देगा कि Ethereum में The Merge के बाद संभवतः सबसे बड़ा आर्किटेक्चरल बदलाव क्या हो सकता है।
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