Google ने अपनी पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी (PQC) माइग्रेशन के लिए 2029 की टाइमलाइन जारी की है।
कंपनी की नई टाइमलाइन तीन बढ़ती हुई गतिविधियों को दर्शाती है। क्वांटम कंप्यूटिंग हार्डवेयर में प्रगति, क्वांटम एरर करेक्शन में सुधार और क्वांटम फैक्टरिंग के लिए रिसोर्स एस्टिमेट्स इसमें शामिल हैं।
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सबसे जरूरी बात, कंपनी ने अपने थ्रेट मॉडल में बदलाव किया है। एन्क्रिप्शन को ‘store-now-decrypt-later’ अटैक से खतरा है, जिसमें विरोधी आज डेटा इकट्ठा करके बाद में क्वांटम कंप्यूटर्स के पावरफुल होने पर उसे डिक्रिप्ट करते हैं।
डिजिटल सिग्नेचर्स भविष्य में खतरा बन सकते हैं, लेकिन इसका समाधान है कि CRQC (Cryptographically Relevant Quantum Computer) आने से पहले PQC यानी पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी पर माइग्रेट किया जाए। इसी वजह से Google ने ऑथेंटिकेशन सर्विसेज में PQC माइग्रेशन को प्राथमिकता दी है और दूसरे इंजीनियरिंग टीम्स को भी ऐसा करने की सलाह दी है।
कंपनी ने अपनी टाइमलाइन के साथ ठोस कदम भी उठाया है। Google ने बताया कि Android 17 में ML-DSA का इस्तेमाल करके PQC डिजिटल सिग्नेचर प्रोटेक्शन शामिल किया जा रहा है। यह Module-Lattice-Based Digital Signature Algorithm है, जिसे National Institute of Standards and Technology (NIST) ने स्टैंडर्डाइज किया है।
यह घोषणा ब्लॉकचेन सिक्योरिटी के लिए एक अहम समय पर आई है। Ethereum Foundation की टीमें भी 2029 तक L1 प्रोटोकॉल अपग्रेड्स को टारगेट कर रही हैं। हालांकि बहुत लोगों का मानना है कि क्वांटम थ्रेट अभी करीब एक दशक दूर है।
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