कैलिफोर्निया की फेडरल कोर्ट में फाइल की गई एक क्लास एक्शन शिकायत में OpenAI पर आरोप लगाया गया है कि उसने ChatGPT यूज़र डेटा को Meta और Google के साथ शेयर किया है। शिकायत में कहा गया है कि कंपनी ने उपभोक्ता की अनुमति के बिना एम्बेडेड ट्रैकिंग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया।
यह मुकदमा उन अमेरिका के निवासियों को कवर करता है जिन्होंने ChatGPT.com पर क्वेरी डाली थी। इसमें कहा गया है कि OpenAI ने पर्सनल सवालों और अकाउंट डिटेल्स को दो उन कंपनियों के पास भेजा, जिनके विज्ञापन नेटवर्क हर दिन अरबों लोगों तक पहुंचते हैं।
यह फाइलिंग ट्रैकिंग टेक्नोलॉजी पर केंद्रित है, जो Meta और Google वेबसाइट ऑपरेटरों को एनालिटिक्स और ऐड टार्गेटिंग के लिए देते हैं। शिकायत के अनुसार, OpenAI ने यह कोड अपने ChatGPT साइट में एम्बेड किया और इसके जरिए यूज़र जानकारी ऑटोमैटिकली ट्रांसमिट हो रही थी।
वादी कहते हैं कि शेयर किए गए डेटा में क्वेरी टॉपिक्स, अकाउंट आईडेंटिफायर्स और यूज़र्स के ईमेल पते शामिल थे। केस का तर्क है कि चैटबॉट इस्तेमाल करने वालों को गोपनीयता की उचित उम्मीद थी। यहां बहुत लोग फाइनेंशियल, मेडिकल और लीगल सेंसीटिव सवाल शेयर करते हैं।
शिकायत में एक Cyberhaven रिपोर्ट का हवाला दिया गया है, जिसमें अनुमान लगाया गया है कि कर्मचारी ChatGPT में जितना डेटा पेस्ट करते हैं, उसमें से लगभग 1% कॉन्फिडेंशियल होता है। यह फिगर लीक हुए कॉरपोरेट मैटीरियल के लिए है। शिकायत में ये चिंता आम लोगों की हेल्थ, पैसे और लीगल सलाह में भी बताई गई है जो चैटबॉट से मदद लेते हैं।
वादी मुआवजा और अदालत से आदेश मांग रहे हैं कि यह प्रैक्टिस तुरंत रोकी जाए। इस मुकदमे में OpenAI को मुख्य आरोपी बनाया गया है। साथ ही Meta और Google को डेटा रिसीवर के तौर पर पहचाना है।
यह नया केस 2023 में दायर एक क्लास एक्शन के बाद आया है, जिसमें OpenAI के मॉडल ट्रेनिंग में इस्तेमाल पर्सनल डेटा पर फोकस था। कई देशों के रेग्युलेटर्स लगातार चैटबॉट की जांच कर रहे हैं। हाल की जांचों में जापान के प्राइवेसी वॉचडॉग की कार्रवाई और यूरोप में NOYB द्वारा फाइल की गई GDPR शिकायत शामिल है।
इस साल की शुरुआत में दायर एक अलग मुकदमे में Perplexity AI पर भी ऐसा ही आचरण करने का आरोप लगा था, जिसमें Meta और Google ट्रैकर्स शामिल थे। कंज़्यूमर AI सर्विसेज़ पर पिक्सल-बेस्ड मॉनिटरिंग, प्राइवेसी मुकदमों का नया फ्रंट बन रही है। इसी तरह, Google के खिलाफ भी कथित तौर पर पर्सनल डेटा के AI ट्रेनिंग में गलत इस्तेमाल को लेकर खुद का मुकदमा चल रहा है।
इन सभी केसों से यह साफ है कि AI कंपनियों पर कानूनी दबाव लगातार बढ़ रहा है। रेग्युलेटर्स चाहते हैं कि यूज़र्स का डेटा कैसे इकट्ठा और ट्रांसफर किया जाता है, इस पर ज्यादा क्लियर रूल्स हों।
OpenAI के लिए यह समय काफी अजीब है। कंपनी अपनी संभावित initial public offering (IPO) के लिए तैयारी कर रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह कंपनी साल के लिए अपने रेवेन्यू और यूजर टारगेट्स को हासिल नहीं कर पाई है।
प्राइवेसी को लेकर लंबे समय तक चलने वाला क्लास एक्शन इस रास्ते को और मुश्किल बना सकता है। ये उन markets में scrutiny भी बढ़ा सकता है जहां यूएस की तुलना में ज्यादा सख्त data protection laws हैं।
कोर्ट plaintiffs के तर्क को स्वीकार करेगा या नहीं, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि जज AI services को लेकर consumer expectations को कैसे interpret करते हैं। ओपनएआई ने साइनअप के समय कितनी जानकारी दी, यह भी अहम रहेगा। अब तक सुनवाई की डेट तय नहीं हुई है, और ओपनएआई ने इस फाइलिंग पर पब्लिकली कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
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