MBA प्रोग्राम्स इस बार एप्लिकेशन में तेज गिरावट के चलते ट्यूशन फीस में 50% तक कटौती कर रहे हैं। मिड-टियर स्कूल्स इस दबाव को झेल रहे हैं, जबकि टॉप-20 ब्रांड्स फीस में कोई बदलाव नहीं कर रहे या बढ़ा रहे हैं।
यह फर्क दिखाता है कि MBA मार्केट मेल्टडाउन की ओर है या बस रीप्राइसिंग हो रही है। ट्यूशन डिस्काउंट आमतौर पर उन प्रोग्राम्स में मिल रहे हैं, जो एलीट टियर से बाहर हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, या AI, ने डिग्री के साथ मिलने वाले स्किल्स कंपोनेंट को कम कर दिया है।
Purdue का Mitch Daniels School of Business अपनी ट्यूशन फीस $60,000 से घटाकर $36,000 कर रहा है, यानी आने वाले स्टूडेंट्स को 40% की कटौती मिलेगी। Johns Hopkins सभी बैचों के लिए 50% स्कॉलरशिप दे रहा है। UC Irvine Flex और Executive प्रोग्राम्स की प्राइस 38% तक कम कर रहा है।
The Wall Street Journal ने रिपोर्ट किया कि ये डिस्काउंट्स डिमांड में नरमी के चलते ग्लोबली रीकैलिब्रेशन का हिस्सा हैं।
इस साइकिल में US के कई MBA प्रोग्राम्स में एप्लिकेशन 20% से 30% तक गिर चुके हैं। कुछ स्कूल्स में इंटरनेशनल एप्लिकेशंस वॉल्यूम में 43% तक की गिरावट आई है।
जुलाई 2026 से लागू होने वाली फेडरल लोन लिमिट्स के चलते ग्रेजुएट स्टूडेंट्स केवल कुल $100,000 तक का लोन ले पाएंगे। इस बदलाव से दो साल के प्रोग्राम्स के लिए फाइनेंसिंग मुश्किल हो जाएगी, जिनकी फीस रहने के खर्च से पहले ही $150,000 या उससे ज्यादा होती है।
इन्वेस्टर और कमेंटेटर Gagan Dhillon ने इस फर्क को स्ट्रक्चरल रीप्राइसिंग बताया, न कि किसी क्रैश के रूप में। उन्होंने कहा कि MBA में हमेशा दो अलग-अलग प्रोडक्ट्स एक ही प्राइस टैग के साथ मिलते हैं।
Harvard, Stanford, Wharton, Booth, Sloan, और Kellogg ने अपनी ट्यूशन फीस या तो स्थिर रखी है या अगले सेशन के लिए बढ़ा दी है। Dhillon की एनालिसिस के मुताबिक, जो स्कूल फीस कम कर रहे हैं, वे टॉप 20 में नहीं आते।
इसके बावजूद, MBA ग्रेजुएट्स के लिए रिक्रूटर डिमांड 2019 में 92% से घटकर 2024 में कुछ सर्वे में 71% रह गई है। शुरुआती लेवल की नौकरियां लगभग 35% कम हो गई हैं।
WSJ ने Dhillon से व्यापक नजरिए में इस दबाव को कवर किया है, जिसमें वीजा का फसना, लोन कैप और भर्तियों में साइक्लिकल कमजोरी के साथ-साथ AI की भूमिका बताई गई है।
अब अगला एडमिशन सेशन देखेगा कि क्या प्रेस्टिज का प्रीमियम, शॉर्ट-टर्म हायरिंग में आई कमजोरी को झेल पाता है। दूसरा ऑप्शन यह है कि फीस में बदलाव, मिड-टियर प्रोग्राम्स से ऊपर की ओर भी बढ़ जाए।
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